Five Chanakya Policies (चाणक्य नीतियां)

ये 5 चाणक्य नीतियां अपनाएंगे तो स्त्री हो या पुरुष कभी धोखा नहीं खाएंगे
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पहली नीति: आचार्य चाणक्य कहते हैं कि किसी भी राजा की शक्ति उसका स्वयं का बाहुबल है। ब्राह्मणों की ताकत उनका ज्ञान होता है। स्त्रियों की ताकत उनका सौंदर्य, यौवन और उनकी मीठी वाणी होती है।

दूसरी नीति: आचार्य कहते हैं कि कभी भी अग्नि, गुरु, ब्राह्मण, गौ, कुमारी कन्या, वृद्ध और बालक, इन सातों को हमारे पैर नहीं लगना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार ये सभी पूजनीय और सदैव पवित्र हैं। अत: इन्हें पैर लगाकर इनका निरादर नहीं करना चाहिए।

तीसरी नीति: चाणक्य के अनुसार ये सात जब भी सोते हुए दिखाई दें तो इन्हें तुरंत उठा देना चाहिए। ये सात लोग इस प्रकार हैं- द्वारपाल, नौकर, राहगीर, भूखा व्यक्ति, भंडारी, विद्यार्थी और डरे हुए व्यक्ति को नींद में से तुरंत जगा देना चाहिए।

चौथी नीति: लक्ष्य कैसे प्राप्त किया जाए... इस संबंध में आचार्य चाणक्य ने बताया है कि किसी भी कार्य की शुरूआत से पहले हमें खुद से तीन सवाल पूछने चाहिए। ये तीन सवाल ही लक्ष्य प्राप्ति में आ रही बाधाओं को पार करने में मददगार साबित होंगे। इसके साथ ही ये कार्य की सफलता भी सुनिश्चित करेंगे। ये तीन प्रश्न हैं-
- मैं ये क्यों कर रहा हूं?
- मेरे द्वारा किए जा रहे इस कार्य के परिणाम क्या-क्या हो सकते हैं?
- मैं जो कार्य प्रारंभ करने जा रहा हूं, क्या मैं सफल हो सकूंगा?

पांचवी नीति: आचार्य कहते हैं जिस धर्म में दया का उपदेश न हो, उस धर्म को छोड़ देना चाहिए। जो गुरु ज्ञानहीन हो उसे त्याग देना चाहिए। यदि पत्नी हमेशा क्रोधित ही रहती है तो उसे छोड़ देना चाहिए और जो भाई-बहन स्नेहहीन हों, उन्हें भी त्याग देना चाहिए।