Aum - Om - ओ३म्

ओ३म्, Aum or Om, according to the ancient scripts of the Vedic civilization, is the sound of life. It is the infinite vibration that shimmers through the Universe, providing life and substance to everything. Om is the beginning of the Universe and will continue till the end of it; the one constant that unites all of creation at its deepest level.

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The chanting of Om revitalizes the body, soothes the mind and nourishes the soul. Hence, Om is considered the most powerful of all Indian mantras (chants), and is the prefix to or the beginning sound of all other mantras.

The Upanishads (Indian Vedic texts), describe Om (or Aum) as the complete sound that encapsulates the entire range of sounds the human voice can make. It starts with A at the base of the throat, moves on to U with the tongue and the palette, and ends with M where the lips are closed and no more sound emanates.

If Divinity were to be represented in sound codes, it would be Om. Om is the purifier, the all powerful tool that awakens in us the deepest reflection of Spirit, or God, or the Universal energy. This is because Om is the representation of this energy and flows through our breath in our waking and sleeping state. Om is the essence that unites all of us at our most intuitive level.

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ॐ ॐ ॐ
ॐ अर्थात् ओउम् तीन अक्षरों से बना है, जो सर्व विदित है ।
अ उ म् ।

"अ" का अर्थ है उत्पन्न होना, "उ" का तात्पर्य है उठना, उड़ना अर्थात् विकास, "म" का मतलब है मौन हो जाना अर्थात् "ब्रह्मलीन" हो जाना।

ॐ सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की wउत्पत्ति और पूरी सृष्टि का द्योतक है। ॐ का उच्चारण शारीरिक लाभ प्रदान करता है।

अनेक बार ॐ का उच्चारण करने से पूरा शरीर तनाव-रहित हो जाता है|

अगर आपको घबराहट या अधीरता होती है तो ॐ के उच्चारण से उत्तम कुछ भी नहीं।

यह शरीर के विषैले तत्त्वों को दूर करता है, अर्थात तनाव के कारण पैदा होने वाले द्रव्यों पर नियंत्रण करता है।

यह हृदय और ख़ून के प्रवाह को संतुलित रखता है।

ॐ के उच्चारण से पाचन शक्ति तेज़ होती है।

इससे शरीर में फिर से युवावस्था वाली स्फूर्ति का संचार होता है।

थकान से बचाने के लिए इससे उत्तम उपाय कुछ और नहीं।

नींद न आने की समस्या इससे कुछ ही समय में दूर हो जाती है। रात को सोते समय नींद आने तक मन में इसको करने से निश्चित नींद आएगी।

कुछ विशेष प्राणायाम के साथ इसे करने से फेफड़ों में मज़बूती आती है।

ॐ के पहले शब्द का उच्चारण करने से कंपन पैदा होती है। इन कंपन से रीढ़ की हड्डी प्रभावित होती है और इसकी क्षमता बढ़ जाती है।

ॐ के दूसरे अक्षर का उच्चारण करने से गले में कंपन पैदा होती है जो कि थायरायड ग्रंथी पर प्रभाव डालता है