संस्कारी माता

संस्कारी माता ही संस्कारी बच्चे तैयार कर सकती है ......

एक समय की बात है हिटलर के सैनिकों ने गांवों और शहरों में लूट मचा दी। एक नौजवान सैनिक को भी लूटपाट के दौरान बहुमूल्य आभूषण प्राप्त हुए। उसने आभूषणों से एक डिब्बा भरकर अपनी मां के पास भेजा। उसने सोचा था कि कीमती जेवर पाकर मां खुश हो जाएगी। पर आश्चर्य, वह डिब्बा उसी के पास लौट आया। उसने डिब्बा खोला तो उसकी मां के हाथ से लिखी एक चिट भी डिब्बे में मिली।

उसमें लिखा था-
'प्रिय पुत्र, तेरे मन में मेरे प्रति श्रद्धा और आदर की भावना है। तू मुझे सुख पहुंचाना चाहता है। शायद इसीलिए यह आभूषण से भरा डिब्बा मेरे लिए भेजा है, पर मैं इसे स्वीकार नहीं कर सकती। यह धन तेरे पसीने की कमाई नहीं, लूटा हुआ है। न जाने कितनी माताओं और बहनों की आहों इसके साथ हैं। मैंने अपने बेटे को देश की सेवा के लिए समर्पित किया है, चोर-डाकू बनने के लिए नहीं।'

मां की इन दो बातों ने उस नौजवान सैनिक की आंखें खोल दीं। उस दिन से उसने सब बुराइयों का परित्याग कर दिया और एक आदर्श सैनिक का उदाहरण प्रस्तुत किया। इस आदर्श जीवन के कारण वह देश के विशिष्ट व्यक्तियों की पंक्ति में खड़ा हो गया। एक बार किसी समारोह में वह अपने आदर्शों के कारण सम्मानित हुआ। समारोह में उसने कहा- 'मैं आज जो कुछ बना हूं, उसमें सारा श्रेय मेरी मां का है।' किसी ने इस संबंध में पूछा तो उसने पूरा किस्सा कह सुनाया। उस दिन लोगों ने अनुभव किया कि संस्कार-निर्माण में एक मां कितनी प्रेरक बनती है।

भारतवर्ष में बच्चे के लालन-पालन में मां की भूमिका अहम होती है।

बच्चो का सबसे बड़ा शिक्षक उसकी माँ होती है

संस्कारी माता ही संस्कारी बच्चे तैयार कर सकती है। परन्तु आज कल कि माता पश्चातीय संस्कृति पर चलकर अपने बच्चो पर ध्यान नहीं देती। आज उस माँ को ही नहीं पता के उसके बच्चे क्या कर रहे है। क्योकि इनके खुद के पास संस्कार नहीं है तो वो अपने बच्चो को कहा से देंगे

जिस तरह से विदेशों में जन्म के कुछ दिनों बाद ही बच्चा माता के ममता भरे संरक्षण से वंचित हो जाता है। शिशुपालन केंद्रों में बच्चे को दूध मिलता है, भोजन मिलता है, खिलौने मिलते हैं, शिक्षा मिलती है और भी बहुत कुछ मिलता है। पर मां का वात्सल्य और संस्कार नहीं मिलते।

अब ये वहां के विशेषज्ञ यह महसूस करने लगे हैं और उन्होंने यह भी कहना शुरू कर दिया है कि बच्चे को उसकी मां का ही दूध मिलना चाहिए। और मां ही अपने बच्चे को संस्कारी बनाती है ।


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